Railway News: गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी चौथी रेल लाइन को कैबिनेट मंजूरी, हापुड़ को मिलेगा नया स्टेशन

Railway News: केंद्रीय कैबिनेट ने गाजियाबाद-सीतापुर रेल खंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस 403 किलोमीटर लंबी परियोजना पर 14,926 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे करीब चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

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Railway News: गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी चौथी रेल लाइन को कैबिनेट मंजूरी, हापुड़ को मिलेगा नया स्टेशन

Railway News: केंद्रीय कैबिनेट ने गाजियाबाद-सीतापुर रेल खंड पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस 403 किलोमीटर लंबी परियोजना पर 14,926 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे करीब चार साल में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे उत्तर प्रदेश के हापुड़ समेत कई जिलों में ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और नई ट्रेनें चलाने की गुंजाइश बढ़ेगी। हापुड़ में नया रेलवे स्टेशन और रेलवे बाईपास भी बनेगा, जिससे यात्री सुविधा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

गाजियाबाद-सीतापुर तीसरी चौथी रेल लाइन परियोजना को कैबिनेट मंजूरी

लंबे समय से इंतजार कर रहे गाजियाबाद से सीतापुर तक की रेल परियोजना को अब हरी झंडी मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की। यह रूट दिल्ली-गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा है, जहां ट्रेनों का दबाव बहुत ज्यादा रहता है।

नई तीसरी और चौथी लाइन बनने से मौजूदा दो लाइनों पर बोझ कम होगा। परियोजना के तहत कुल 403 किलोमीटर नई ट्रैक बिछाई जाएगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पूरा काम चार साल के अंदर पूरा हो जाएगा। इससे यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम होगी।

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और देरी कम होगी

वर्तमान में गाजियाबाद-सीतापुर रूट पर कई जगह सिंगल लाइन होने की वजह से ट्रेनों को सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है। खासकर गर्मी के मौसम में यह समस्या बढ़ जाती है। नई लाइनों के बनने से इस दबाव में काफी कमी आएगी।

मौजूदा लाइन की क्षमता 168 प्रतिशत तक उपयोग हो रही है, जो काफी ज्यादा है। नई तीसरी और चौथी लाइन तैयार होने के बाद ट्रेनों की औसत स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकेगी। इससे यात्री समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे और सफर ज्यादा आरामदायक होगा।

ट्रेनों की समयबद्धता बढ़ने से यात्री और रेलवे दोनों को फायदा होगा। नई ट्रेनें चलाने की भी संभावना बढ़ जाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

हापुड़ रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा में सुधार

हापुड़ रेलवे स्टेशन इस रूट पर काफी महत्वपूर्ण है। यहां से रोजाना हजारों यात्री मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, प्रयागराज और दिल्ली की ओर यात्रा करते हैं। फिलहाल स्टेशन पर रोजाना 50 से ज्यादा पैसेंजर, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव होता है।

नई लाइन बनने के बाद पिछली ट्रेनें समय पर चलेंगी, जिससे आगे वाली ट्रेनों को भी देरी नहीं होगी। हापुड़ के यात्रियों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे रोजाना की यात्रा आसान और सुविधाजनक हो जाएगी।

हापुड़ में नया रेलवे स्टेशन और बाईपास की सौगात

इस परियोजना के तहत हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर, बरेली और सीतापुर में कुल छह नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें हापुड़ का नया स्टेशन भी शामिल है।

हापुड़ में नया स्टेशन जिंदलनगर या प्रीत विहार क्षेत्र में बनने की संभावना है, हालांकि रेलवे मुख्यालय से अभी इसकी सटीक जगह की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही मुख्य शहरों को बाईपास करने का प्रावधान रखा गया है ताकि ट्रेनें बिना रुके आगे बढ़ सकें।

रेलवे बाईपास से हापुड़ शहर में ट्रेनों की भीड़ कम होगी और निर्बाध परिवहन सुनिश्चित होगा। नए स्टेशन से आसपास के इलाकों के लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।

पूरे रूट पर ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगेगा

ट्रेन संचालन को और बेहतर बनाने के लिए पूरे गाजियाबाद-सीतापुर रूट पर सिग्नल सिस्टम को ऑटोमेटिक बनाने का काम चल रहा है। हर 10 किलोमीटर पर ऑटोमेटिक ब्लॉक हट का निर्माण तेजी से हो रहा है।

हापुड़-गाजियाबाद खंड में श्यामनगर फाटक, निजामपुर, जिंदल नगर, आध्यात्मिक नगर और महरौली के बीच यह काम जारी है। ऑटोमेटिक सिग्नल शुरू होने के बाद ट्रेनों को सिग्नल के इंतजार में रुकना नहीं पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से निकलते ही आगे ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा।

इससे एक ही रूट पर ट्रेनें एक के पीछे एक तेज गति से चल सकेंगी। सुरक्षा भी बढ़ेगी और देरी काफी हद तक कम हो जाएगी।

यात्रियों को मिलने वाले मुख्य फायदे

नई रेल लाइन से कई व्यावहारिक लाभ होंगे। ट्रेनों की स्पीड बढ़ने से यात्रा का समय कम होगा। भीड़भाड़ वाली लाइनों पर दबाव घटेगा और नई ट्रेनें चलाने की जगह बढ़ेगी।

नए स्टेशनों से आसपास के इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेलवे बाईपास से मुख्य शहरों में ट्रेनों की भीड़ कम होगी। ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम से कम देरी और ज्यादा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। हापुड़, मुरादाबाद, बरेली और सीतापुर जैसे शहरों के यात्रियों के लिए यह सुविधा बड़ी राहत साबित होगी।

परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ने की उम्मीद है। यात्री और माल परिवहन दोनों आसान होंगे। रेलवे इस प्रोजेक्ट को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ा रहा है।

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