Orbital Rail Corridor: दिल्ली-एनसीआर में नमो भारत रैपिड रेल के बाद अब एक और बड़ा कदम उठने जा रहा है। नोएडा और गाजियाबाद को हरियाणा से जोड़ने वाला ऑर्बिटल रेल (Orbital Rail) कॉरिडोर तैयार हो रहा है। यह रेल दिल्ली के बाहर एक रिंग की तरह काम करेगी, जिसमें ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी। इससे दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ कम होगी और आसपास के शहरों के बीच सफर आसान और तेज हो जाएगा।
यह कॉरिडोर हरियाणा के सोनीपत और कुंडली से शुरू होकर बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा होते हुए पलवल तक जाएगा। पूरे रूट की लंबाई करीब 270 किलोमीटर बताई गई है। उत्तर प्रदेश में यह बागपत, हापुड़, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा व ग्रेटर नोएडा) को कवर करेगा।
ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर क्या है? (Orbital Rail Corridor)
यह प्रोजेक्ट दो हिस्सों का मिलन है। पश्चिम में हरियाणा ऑर्बिटल रेल और पूर्व में ईस्टर्न ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (EORC) शामिल है। इसमें नोएडा-गाजियाबाद रैपिड रेल लिंक भी जुड़ेगा। ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा की स्पीड से दौड़ेंगी। गाजियाबाद और नोएडा के बीच मेट्रो और रैपिड रेल को मिलाकर 12 से 22 स्टेशन बनाए जाएंगे।
यह रेल दिल्ली के बाहर-बाहर रिंग रोड की तरह नेटवर्क बनाएगी, जिससे ट्रैफिक का दबाव शहर के अंदर कम पड़ेगा।
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक लिंक
ऑर्बिटल रेल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गाजियाबाद से नोएडा में जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा। यह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर बनेगा। इसे नमो भारत रैपिड रेल (RRTS) से जोड़ा जाएगा। गाजियाबाद के दुहाई रैपिड रेल स्टेशन पर दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर से कनेक्शन होगा।
इससे गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट की दूरी महज 45-50 मिनट में तय हो सकेगी। जेवर एयरपोर्ट के यात्रियों के लिए यह सुविधा काफी मददगार साबित होगी।

गाजियाबाद-नोएडा की लोकल रेल कनेक्टिविटी
नोएडा में अभी कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है। इससे गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के बीच यात्रियों को कनेक्टिविटी की दिक्कत होती है। ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर इस समस्या को दूर करेगा। भविष्य में यह रैपिड रेल और मेट्रो के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में बिना ट्रैफिक जाम के सफर का प्रमुख साधन बन जाएगा।
इससे नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली स्टेशनों पर भीड़ घटेगी। गाजियाबाद के दुहाई और ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी, दादरी इलाके में जमीन के दाम बढ़ने की संभावना है।
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के लिए फायदेमंद
यात्रियों के अलावा यह कॉरिडोर माल ढुलाई के लिए भी उपयोगी होगा। दादरी को मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा के दादरी में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से कनेक्शन होगा।
इससे नोएडा और गाजियाबाद की इंडस्ट्री का माल सीधे बंदरगाह या एयरपोर्ट पहुंच सकेगा। कॉरिडोर के किनारे वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्क बनाए जाएंगे। गाजियाबाद की लोहा मंडी, लोनी और नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग हब को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
किन-किन एक्सप्रेसवे और हाईवे से जुड़ेगा?
यह रेल कॉरिडोर कई बड़े रोड नेटवर्क से जुड़ेगा। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी होगी।
NH-44 (दिल्ली-मथुरा), NH-34 (गाजियाबाद-मेरठ), NH-9 (दिल्ली-हापुड़), NH-334 C (गाजियाबाद-बुलंदशहर) और NH-3 (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे) से भी लिंक बनेगा। दुहाई के पास रैपिड रेल कॉरिडोर से कनेक्शन होगा, जिससे यात्रियों को मेट्रो और रैपिड रेल बदलने में आसानी होगी।
एनसीआर में यह ट्रांसपोर्ट का बड़ा नेटवर्क तैयार करेगा, जिससे सामान की आवाजाही सस्ती और तेज होगी।
प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति
हरियाणा ऑर्बिटल रेल (पलवल-सोनीपत) का काम 60 फीसदी से ज्यादा पूरा हो चुका है। गाजियाबाद-नोएडा-जेवर लिंक के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट का अध्ययन हो चुका है। केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है।
हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HRIDC) ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट गाजियाबाद अथॉरिटी को सौंप दी है। उत्तर प्रदेश में जीडीए नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी। तकनीकी अध्ययन के बाद निर्माण कार्य 2026 के अंत या 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
यह प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा और क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करेगा।
