Agra Cantt Railway Station: उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों द्वारा एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी के साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय व्यवहार करने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्टेशन पर तैनात डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट (DSS) नरेंद्र चाहर को आरपीएफ के जवानों ने न केवल थप्पड़ मारे, बल्कि उन्हें जमीन पर पटक कर करीब 300 मीटर की दूरी तक घसीटते हुए थाने ले गए।
इस पूरे विवाद के पीछे स्टेशन उपाधीक्षक की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने मानवता दिखाते हुए एक महिला यात्री की मदद की थी और उसके ट्रेन में न चढ़ पाने की स्थिति में ट्रेन को रुकवा दिया था। रविवार सुबह करीब 11 बजे हुई इस पूरी वारदात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषी 4 आरपीएफ कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।
चलती ट्रेन में नहीं चढ़ पा रही थी महिला यात्री
घटनाक्रम के अनुसार, रविवार सुबह करीब 11 बजे आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर अमृतसर से चलकर आने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस ट्रेन आकर रुकी थी। इसी दौरान ट्रेन में सवार एक महिला यात्री रंजीता राव नीचे उतरी और प्लेटफॉर्म पर कुछ सामान खरीदने लगी। इसी बीच ट्रेन अचानक चलने लगी। महिला ने घबराहट में चलती हुई ट्रेन के डिब्बे में चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन रफ्तार बढ़ने के कारण वह सफल नहीं हो पाई और प्लेटफॉर्म पर ही फंस गई।
महिला को इस तरह मुसीबत में भागते देख प्लेटफॉर्म पर मौजूद ड्यूटी पर तैनात DSS नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाई। उन्होंने अपने वॉकी-टॉकी के जरिए सीधे ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) से संपर्क किया और उसे स्थिति की जानकारी देकर ट्रेन को तुरंत रोकने के निर्देश दिए।
मदद करने पर RPF ने मढ़ा चेन पुलिंग का आरोप, हुआ विवाद
डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के निर्देश के बाद जैसे ही लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए और ट्रेन की रफ्तार कम हुई, तो पीड़ित महिला उसमें चढ़ने लगी। लेकिन तभी वहां तैनात आरपीएफ के जवानों ने दखल दिया और महिला यात्री को अवैध रूप से ‘चेन पुलिंग’ करने के आरोप में जबरन पकड़ लिया। प्लेटफॉर्म पर मौजूद DSS नरेंद्र चाहर ने तुरंत इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने जवानों को साफ शब्दों में टोकते हुए बताया कि महिला ने कोई चेन पुलिंग नहीं की है, बल्कि खुद उन्होंने आधिकारिक तौर पर वॉकी-टॉकी से सूचना देकर ट्रेन को रुकवाया है।
लेकिन सत्ता के नशे में चूर आरपीएफ जवान उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हुआ और उसने अधिकारी की बात मानने से साफ इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया।
300 मीटर तक फर्श पर घसीटते रहे जवान, थप्पड़ भी मारे
विवाद बढ़ते ही आरपीएफ जवान ने तुरंत वॉकी-टॉकी से अपने अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद आरपीएफ के जवानों ने मिलकर DSS नरेंद्र चाहर को जबरन पकड़ लिया। जब अधिकारी ने इस अनधिकृत कार्रवाई का विरोध किया, तो जवानों ने उन्हें प्लेटफॉर्म के फर्श पर नीचे गिरा दिया। लगभग 1 मिनट तक मौके पर भारी धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी चलती रही। इस दौरान नरेंद्र चाहर के केबिन में मौजूद अन्य रेलवे स्टाफ लगातार आरपीएफ कर्मियों से ऐसा अमानवीय व्यवहार न करने की गुहार लगाता रहा, लेकिन जवानों ने उनकी एक न सुनी।
आरपीएफ की टीम DSS को हाथ और पैर से पकड़कर फर्श पर घसीटते हुए करीब 300 मीटर दूर स्थित आरपीएफ थाने ले गई। इस दौरान पीड़ित अधिकारी दर्द और लाचारी में फर्श पर छटपटाते रहे। दूसरी ओर, आरपीएफ जवानों का आरोप है कि DSS ने पहले उनके साथ गाली-गलौज की थी और ऑन-ड्यूटी अभद्रता की थी।
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रेलवे कर्मचारियों का भारी हंगामा, 4 कर्मी सस्पेंड और जांच कमेटी गठित
अपने वरिष्ठ अधिकारी के साथ आरपीएफ द्वारा की गई इस अमानवीयता और मारपीट की खबर जैसे ही स्टेशन पर फैली, तमाम रेलवे कर्मचारी और यूनियन के लोग भड़क गए। बड़ी संख्या में रेलकर्मियों ने आरपीएफ थाने का घेराव कर दिया और बाहर खड़े होकर जोरदार नारेबाजी करते हुए विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि एक महिला की मदद करने पर अधिकारी के साथ ऐसा अमानवीय कृत्य पूरी तरह बर्दाश्त से बाहर है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए आगरा रेलवे मंडल प्रशासन ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है। आगरा रेलवे मंडल के जन सूचना अधिकारी (PRO) संजय गौतम ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे मामले में घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में आरपीएफ इंस्पेक्टर और 4 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। निलंबित होने वालों में आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कॉन्स्टेबल बदन सिंह और कॉन्स्टेबल जितेंद्र शामिल हैं।
इसके साथ ही घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में स्टेशन डायरेक्टर, आरपीएफ के असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर और एओएम (AOM) को शामिल किया गया है। यह कमेटी विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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