India’s First Hydrogen Train Trial: भारतीय रेलवे के इतिहास में 26 जून 2026 (शुक्रवार) का दिन एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन साबित हुआ है। पटरियों पर अब शोर, कालिख और जहरीले धुएं की जगह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की रफ्तार दिखाई देगी। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन ने अपना अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
यह ऐतिहासिक परीक्षण पुरानी दिल्ली-सोनीपत-जींद रेलखंड पर किया गया। दोपहर से लेकर देर शाम तक चले इस सघन परीक्षण के दौरान ट्रेन ने ट्रैक पर 85 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ लगाई और सभी सुरक्षा मानकों पर खरी उतरी।
इस अत्याधुनिक हरित ट्रेन के परीक्षण की कमान दिल्ली मुख्यालय से आए प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर के हाथों में थी। उनके नेतृत्व में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विंग की विशेष टीम ने ट्रेन के इलेक्ट्रिकल सिस्टेमैटिक वायरिंग, बैलेंसिंग, सिग्नलिंग नेटवर्क और सबसे महत्वपूर्ण ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कड़े सुरक्षा मानकों को बहुत बारीकी से परखा।
सुबह से शाम तक चले ट्रायल के सफर की इनसाइड स्टोरी
परीक्षण की शुरुआत शुक्रवार सुबह 09:10 बजे हुई, जब इस ट्रेन को दो डीजल इंजनों के सहारे 75 किमी/घंटा की नियंत्रित गति से जींद स्टेशन से दिल्ली लाया गया। इसके बाद दोपहर करीब 12:00 बजे दिल्ली से सोनीपत के लिए इसके मुख्य ट्रायल सफर का आगाज हुआ।
दोपहर 01:25 बजे यह ट्रेन पहली बार सोनीपत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर पहुंची। यहाँ इसे लगभग 29 मिनट तक रोका गया, ताकि ट्रैक से वंदे भारत एक्सप्रेस सहित तीन अन्य हाई-स्पीड पैसेंजर ट्रेनों को रास्ता (क्लियरेंस) दिया जा सके। इसके बाद तकनीकी टीम की हरी झंडी मिलते ही ट्रेन ने जींद-सोनीपत अप और डाउन ट्रैक पर देर शाम तक कुल चार चक्कर लगाए। ट्रायल के दौरान जारी वीडियो में ट्रेन को जींद स्टेशन से शान से रवाना होते देखा गया, जहां अधिकारी कंप्यूटर स्क्रीन और सेंसर की मदद से इसके प्रदर्शन पर नजर रख रहे थे।
#WATCH | हरियाणा: आज दिल्ली और जींद के बीच हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन हुआ। इस ट्रायल में इमरजेंसी ब्रेकिंग दूरी और ऑसिलेशन पर ध्यान दिया गया।
(सोर्स: भारतीय रेलवे) pic.twitter.com/D8GUpCDhvk
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 26, 2026
हाइड्रोजन ट्रेन का रूट, संभावित किराया और कोच कंपोजिशन
भारतीय रेलवे इस ऐतिहासिक ट्रेन को सबसे पहले हरियाणा राज्य में शुरू करने जा रहा है। इसका मुख्य रूट जींद से सोनीपत के बीच तय किया गया है, जिसके बीच में गोहाना स्टेशन भी मुख्य पड़ाव के रूप में आएगा। दिखने में यह ट्रेन बेहद आकर्षक और नीले रंग की है, जिस पर खूबसूरत सफेद धारियां (स्ट्रिप्स) बनी हुई हैं।
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की संरचना (2026) (India’s First Hydrogen Train)
- कुल डिब्बे (Coaches): 10
- यात्री डिब्बे (Passenger Coaches): 08
- ड्राइविंग पावर कार (DPC): 2 (क्षमता: 200 kW प्रत्येक)
- कुल पावर क्षमता: 2400 kW (दुनिया की सबसे शक्तिशाली)
क्या होगा टिकट का दाम?
हालांकि, रेल मंत्रालय और सरकार की ओर से इस ट्रेन की समय-सारिणी (Time Table) और आधिकारिक किराए की लिस्ट जारी होना अभी बाकी है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि आम जनता और दैनिक यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसका किराया बेहद किफायती रखा जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस हाई-टेक ट्रेन का न्यूनतम किराया मात्र ₹5 और अधिकतम किराया सिर्फ ₹25 तय किया जा सकता है। बाकी बची हुई प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इसे बहुत जल्द आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
तकनीक और खासियत: क्यों खास है यह ट्रेन?
पारंपरिक ट्रेनें जहां डीजल या ग्रिड बिजली का इस्तेमाल करती हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है, वहीं यह स्वदेशी ट्रेन अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक (Hydrogen Fuel Cell Technology) पर काम करती है।
- काम करने का तरीका: इस ट्रेन में ईंधन के रूप में प्रयुक्त हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच केमिकल रिएक्शन (रासायनिक प्रक्रिया) कराई जाती है, जिससे भारी मात्रा में बिजली पैदा होती है।
- जीरो पॉल्यूशन: इस पूरी प्रक्रिया में कोई जहरीली गैस, नाइट्रोजन ऑक्साइड या धुआं पैदा नहीं होता है। साइलेंसर से धुएं के बदले सिर्फ शुद्ध पानी की बौछारें और भाप (Water Vapor) बाहर निकलती है, जो पर्यावरण को 100% सुरक्षित रखती है।
- भारतीय रेलवे का विजन 2030: यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के वर्ष 2030 तक ‘नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन’ (शून्य कार्बन उत्सर्जन) के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
इस स्वदेशी तकनीक के सफल विकास के साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा महाशक्तियों के क्लब (जैसे जर्मनी, चीन, जापान और अमेरिका) में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन परिवहन का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान समय में ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर चलने वाली यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन है।
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