हापुड़ रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण तीन साल बाद भी अधूरा, रोजाना हजारों यात्री परेशान

हापुड़ रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत शुरू हुआ जीर्णोद्धार तीन साल बाद भी अधूरा। नया FOB, लिफ्ट और एस्केलेटर का काम रुका, यात्री परेशान। पूरी अपडेट पढ़ें।

Sheetal Kumar Nehra
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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय...
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हापुड़ रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत शुरू हुआ जीर्णोद्धार तीन साल बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा है। कई जरूरी सुविधाएं अभी भी अधर में हैं, जिससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भारी दिक्कत हो रही है।

तीन साल पहले रेलवे प्रशासन ने स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का दावा किया था। कहा गया था कि काम तय समय में और अच्छी गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन हकीकत ये है कि स्टेशन की सूरत पूरी तरह नहीं बदली। बड़े-बड़े विकास कार्य अभी भी अधूरे हैं।

हापुड़ गुड़ और गल्ला मंडी के लिए पूरे देश में जाना जाता है। यहां का रेलवे स्टेशन व्यापारिक लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। अंग्रेजों के जमाने में बना यह जंक्शन रोजाना करीब 60 पैसेंजर, एक्सप्रेस और स्पेशल ट्रेनों का ठहराव स्थल है। रोज हजारों यात्री यहां से सफर करते हैं। इसलिए यहां आधुनिक सुविधाओं की मांग लंबे समय से चल रही थी।

किन कामों पर लगी है मुहर

शुरुआती चरण में प्लेटफॉर्म नंबर एक की ऊंचाई बढ़ाई गई, नया वेटिंग हॉल बना, नए शौचालय तैयार हुए, आधुनिक टिकट काउंटर लग गए और भव्य मुख्य द्वार का निर्माण भी पूरा हो गया। निकास द्वार का काम अभी चल रहा है। लेकिन स्टेशन के अंदरूनी ढांचे में बड़े बदलाव अभी भी अधूरे पड़े हैं। यात्रियों को असल राहत देने वाले काम रुके हुए हैं।

प्लेटफॉर्म बदलना बना मुसीबत

सबसे बड़ी परेशानी एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म जाने में हो रही है। बारिश के मौसम में अंडरपास में कब पानी भर जाए, कोई नहीं बता सकता। बुजुर्ग और महिला यात्री खासतौर पर परेशान रहते हैं। योजना में 12 मीटर चौड़ा नया फुट ओवरब्रिज (एफओबी), ऑटोमैटिक सीढ़ियां (एस्केलेटर) और दोनों तरफ लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव था। कहा गया था कि यह एफओबी करीब एक साल में तैयार हो जाएगा। लेकिन अभी कुछ महीने पहले सिर्फ पिलर खड़े किए जा सके हैं। लिफ्ट और एस्केलेटर का काम तो शुरू भी नहीं हुआ।

काम की रफ्तार क्यों थम गई

शुरुआत में रेलवे के बड़े अधिकारी मौके पर आकर निरीक्षण करते और निर्देश देते थे। लेकिन समय बीतने के साथ काम की गति काफी धीमी पड़ गई। प्लेटफॉर्म नंबर चार और पांच के सुंदरीकरण का काम भी लंबे समय से अटका पड़ा है। स्थानीय लोग और रोजाना सफर करने वाले यात्री कहते हैं कि देरी की वजह से उन्हें हर दिन असुविधा झेलनी पड़ रही है।

रेलवे प्रशासन का आश्वासन

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की कोशिश जारी है। बारिश के मौसम ने भी कुछ काम प्रभावित किया। नया फुट ओवरब्रिज का मुख्य ढांचा लखनऊ में तैयार हो रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही वह हापुड़ पहुंच जाएगा। लिफ्ट, एस्केलेटर और बाकी बाकी काम भी जल्द पूरे कराने का वादा किया गया है।

हापुड़ स्टेशन व्यापार और यात्री आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। तीन साल बीतने के बाद भी यात्री आधुनिक सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। अगर काम की रफ्तार नहीं बढ़ी तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस देरी पर गंभीरता से ध्यान दे और अधूरे कामों को प्राथमिकता के साथ पूरा करे।

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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स आदि ) में अपनी सेवाएं प्रदान की है।
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