भारतीय रेलवे का बड़ा कारनामा! मुंबई से गुजरात के लिए दौड़ी देश की पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन

Indian Railways Double Stack Container Train 2026: भारतीय रेलवे ने जेएनपीटी मुंबई से वडोदरा तक 360 TEUs कंटेनरों वाली पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन चलाकर रचा इतिहास। जानिए इसके मुख्य फायदे।

Sheetal Kumar Nehra
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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय...
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भारतीय रेलवे का बड़ा कारनामा! मुंबई से गुजरात के लिए दौड़ी देश की पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन

मुंबई। भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए 21 अगस्त 2026 को बड़ी परिचालन सफलता हासिल की। रेलवे ने मुंबई के जेएनपीटी (JNPT) से गुजरात के वडोदरा मंडल स्थित वर्नामा के कॉनकोर (CONCOR) जीसीटी टर्मिनल के लिए देश की पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन को सफलता पूर्वक रवाना किया।

360 टीईयू कंटेनरों के साथ 422 किमी का लंबा सफर

जेएनपीटी बंदरगाह से शाम 7:00 बजे रवाना हुई इस विशेष लॉन्ग-हॉल ट्रेन ने करीब 422 किलोमीटर का सफर तय किया। दो डबल-स्टैक ट्रेनों को आपस में जोड़कर बनाई गई इस ट्रेन के जरिए एक ही बार में रिकॉर्ड 360 टीईयू (TEUs) कंटेनरों का सुरक्षित परिवहन किया गया।

इस लॉन्ग-हॉल मालगाड़ी को दो हिस्सों (रेक) में संयोजित किया गया था:

  • लीडिंग (अगला) रेक: जेएनपीटी से वडोदरा | लोड: 45+1 | लोको नंबर: 60311 | कुल वजन: 1,817 टन
  • ट्रेलिंग (पिछला) रेक: जेएनपीटी से वडोदरा | लोड: 45+1 | लोको नंबर: 24690 | कुल वजन: 2,105 टन

 

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माल परिचालन और लॉजिस्टिक्स में होंगे ये 5 बड़े फायदे

रेलवे द्वारा चलाए गए इस विशेष डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ऑपरेशन से माल परिवहन व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिलेंगे:

  • पोर्ट और टर्मिनलों पर भीड़ में कमी: बंदरगाहों पर कंटेनरों का ठहराव समय (Dwell Time) घटेगा, जिससे टर्मिनलों से सामान की निकासी बेहद तेज गति से हो सकेगी।
  • संसाधनों (रॉलिंग स्टॉक) की बचत: एक साथ दो ट्रेनों का माल ढोने से लोकोमोटिव (इंजनों) और कंटेनर वैगनों की आवश्यकता में काफी कमी आएगी।
  • रेल रूट की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल: कम मालगाड़ियों में अधिक सामान ले जाने से रेलवे ट्रैक और रूट कैपेसिटी का अधिकतम उपयोग संभव होगा।
  • ट्रांजिट टाइम में भारी गिरावट: कंटेनरों की त्वरित आवाजाही से माल को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कम समय लगेगा।
  • लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: एक बार में अधिक माल ढोने से प्रति कंटेनर परिवहन लागत घटेगी, जिससे व्यापारियों और उद्योग जगत को सीधा फायदा होगा।

हरित एवं प्रदूषण मुक्त माल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम

यह सफल संचालन पर्यावरण संरक्षण और हरित रेल परिवहन के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। पूरी तरह से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव द्वारा संचालित यह ट्रेन सड़कों पर डीजल चालित ट्रकों की निर्भरता को बहुत हद तक कम करेगी।

एक सिंगल डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल ट्रेन सैकड़ों ट्रकों के बराबर माल अकेले ले जाने में सक्षम है। इससे डीजल की खपत कम होगी, राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण को लाभ पहुंचेगा।

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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स आदि ) में अपनी सेवाएं प्रदान की है।
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