CCEA Railway Projects: ओडिशा और झारखंड को ₹3907 करोड़ की रेलवे सौगात! बिछेगी 145 किमी लंबी नई रेल लाइन

CCEA Railway Projects: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड में ₹3,907 करोड़ की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे 145 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा।

Sheetal Kumar Nehra
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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय...
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CCEA Railway Projects: ओडिशा और झारखंड को ₹3907 करोड़ की रेलवे सौगात! बिछेगी 145 किमी लंबी नई रेल लाइन

CCEA Railway Projects: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बुधवार को देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड राज्यों के चार जिलों को कवर करने वाली ₹3,907 करोड़ की अनुमानित लागत वाली दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा रेल नेटवर्क में लगभग 145 किलोमीटर का नया विस्तार देखने को मिलेगा, जिससे रेल यातायात और माल ढुलाई की रफ्तार को एक नई दिशा मिलेगी।

कैबिनेट के अनुसार, इन नई रेल परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से संबंधित रूटों पर रेलवे लाइनों की क्षमता में ऐतिहासिक सुधार होगा। इससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम, सुरक्षित और तेज हो जाएगी। इसके साथ ही भारतीय रेलवे की समग्र परिचालन क्षमता और उसकी सेवा विश्वसनीयता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

1,526 गांवों और 14 लाख लोगों को मिलेगा सीधा लाभ (CCEA Railway Projects)

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट्स से सीधे तौर पर करीब 1,526 गांवों को मजबूत और सुगम रेल संपर्क (Connectivity) मिलेगा। इन ग्रामीण इलाकों में रहने वाली लगभग 14 लाख की आबादी को अब मुख्य शहरों तक सफर करने में बेहद आसानी होगी। इसके साथ ही, इन रेल मार्गों के विस्तार से देश के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं और सैलानियों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी। इनमें मुख्य रूप से प्रसिद्ध ललितगिरि बौद्ध परिसर, ऐतिहासिक श्री बालदेवज्यू मंदिर और प्राकृतिक रूप से समृद्ध मेघाहातुबुरु हिल्स जैसे अहम पर्यटन व ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं।

औद्योगिक विकास और माल ढुलाई में आएगी तेजी

कैबिनेट द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि ये दोनों रेल मार्ग देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले कोयला, लौह अयस्क (आयरन ओर), डोलोमाइट, चूना पत्थर (लाइमस्टोन) और जिप्सम जैसी महत्वपूर्ण खनिज संपदा व औद्योगिक वस्तुओं के त्वरित परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। परियोजनाओं के पूरी तरह तैयार होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में बड़ी वृद्धि दर्ज की जाएगी। इससे देश के माल परिवहन तंत्र को मजबूती मिलेगी और रेलवे हर साल अतिरिक्त 44 मिलियन टन (MTPA) माल का परिवहन करने में सक्षम हो सकेगा।

पर्यावरण को होगा भारी फायदा, बचेगा 6 करोड़ लीटर तेल

सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी इन परियोजनाओं के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया है। चूंकि रेलवे परिवहन का सबसे अनुकूल और ऊर्जा-कुशल माध्यम है, इसलिए इन परियोजनाओं से भारत को अपने राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी। इससे माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की कुल लागत तो कम होगी ही, साथ ही देश के लगभग 6 करोड़ लीटर ईंधन (तेल) की भी भारी बचत होगी।

इसके अलावा, इस पहल से वायुमंडल में लगभग 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन में कमी आएगी। यह पर्यावरणीय लाभ देश में लगभग 1 करोड़ नए पेड़ लगाने से मिलने वाले लाभ के बराबर आंका गया है।

यह पूरी योजना भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन तालमेल के जरिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नई ताकत देना है। कैबिनेट के मुताबिक, यह कदम प्रधानमंत्री के ‘न्यू इंडिया’ के विजन को साकार करेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

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Sheetal Kumar Nehra को पत्रकारिता के क्षेत्र में कंटेंट रइटिंग का 17 साल का अनुभव है। शीतल कुमार नेहरा ने विभिन्न संस्थानों (अमरउजाला, पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स आदि ) में अपनी सेवाएं प्रदान की है।
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