प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के उप मुख्य अभियंता हेम चंद्र बोराह और उनकी पत्नी गायत्री सैकिया की 65.60 लाख रुपये मूल्य की तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है, जो सीबीआई की जांच पर आधारित है। जांच में पता चला कि दोनों ने 1 अप्रैल 2016 से 17 जनवरी 2021 तक अपनी वैध आय से कहीं ज्यादा 73.76 लाख रुपये की संपत्ति जमा की, जो उनकी कुल ज्ञात आय का 86.88 प्रतिशत है।
ईडी की जांच और सीबीआई का केस
ईडी के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने इस मामले में जानकारी दी। हेम चंद्र बोराह पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में उप मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पत्नी गायत्री सैकिया गुवाहाटी के भास्कर विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय में सरकारी शिक्षिका हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की थी। CBI ने 25 मार्च 2025 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद ED ने PMLA के अंतर्गत अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की। दोनों जांचों से यह साफ हुआ कि आरोपियों ने रिश्वत के रूप में प्राप्त अवैध धन को वैध बनाने का तरीका अपनाया।
कितनी संपत्ति बनी और कितनी आय थी
जांच अवधि के दौरान हेम चंद्र बोराह और गायत्री सैकिया ने मिलकर 73.76 लाख रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अर्जित की। यह राशि उनके सभी वैध स्रोतों (मुख्य रूप से वेतन) से हुई कुल आय का 86.88 प्रतिशत थी। ED ने तीन अचल संपत्तियों को जब्त किया है जिनकी कुल कीमत 65.60 लाख रुपये है। आगे की जांच अभी जारी है।
रिश्वत के पैसे से खर्च, वेतन से संपत्ति
जांच में एक अहम बात सामने आई। दोनों के पास कुल सात बैंक खाते थे, लेकिन पूरे अवधि में ATM और UPI से कुल नकद निकासी सिर्फ 1,36,894 रुपये ही हुई। इसका मतलब साफ था कि रोजमर्रा के घरेलू खर्च अवैध नकदी (रिश्वत) से चलाए गए।
इससे उनका वैध वेतन बैंक खातों में जमा होता रहा। बाद में इसी जमा वेतन से चेक के जरिए अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जिन्हें वे वैध और दागरहित संपत्ति के रूप में दिखा रहे थे। ED की जांच में यह तरीका सुनियोजित माना गया।
क्या कहते हैं नियम
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(e) के तहत आय के ज्ञात स्रोतों से ज्यादा संपत्ति रखना अपराध है। CBI ने हेम चंद्र बोराह पर इस धारा के साथ धारा 13(2) और पत्नी पर आईपीसी धारा 109 के साथ संबंधित धाराओं में आरोप लगाए हैं। ED ने PMLA के तहत संपत्ति जब्त करके इस मामले को आगे बढ़ाया है।
यह मामला सरकारी कर्मचारियों में भ्रष्टाचार और संपत्ति के स्रोत को लेकर उठने वाले सवालों को फिर से सामने लाता है। रेलवे जैसे बड़े विभाग में काम करने वाले अधिकारी और उनके परिवार पर लगे आरोपों की पूरी जांच हो रही है।
आगे क्या होगा
अभी दोनों आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई चल रही है। कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है। ईडी ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद और संपत्तियों या सबूतों के मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों को याद दिलाया जा रहा है कि भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।
