नई दिल्ली: रेलवे की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के महत्वपूर्ण मार्गों पर स्वदेशी कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम का विस्तार करने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर करीब 362 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत फिरोजपुर और जम्मू मंडल में कुल 1,478 रूट किलोमीटर पर कवच प्रणाली लगाई जाएगी।
परियोजना की लागत और कवरेज
इस मंजूरी के बाद फिरोजपुर मंडल में बचे हुए 1,012 रूट किलोमीटर पर लगभग 241 करोड़ रुपये की लागत से कवच सिस्टम स्थापित किया जाएगा। वहीं जम्मू मंडल में जलंधर सिटी जंक्शन से जम्मू तवी, जम्मू तवी से श्री माता वैष्णो देवी कटरा, बटाला जंक्शन से पठानकोट जंक्शन और बनिहाल से बारामूला वाले सेक्शनों पर करीब 466 रूट किलोमीटर पर 121 करोड़ रुपये खर्च करके कवच लगाया जाएगा।
कवच सिस्टम में क्या-क्या लगेगा
परियोजना के तहत रेलवे ट्रैक के किनारे स्थायी कवच उपकरण लगाए जाएंगे। साथ ही 40 मीटर ऊंचे संचार टावर और एंटीना इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किए जाएंगे। इससे सिस्टम बिना किसी रुकावट के काम कर सकेगा और ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी।
कवच क्या है और कैसे काम करता है
कवच भारत में विकसित एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। यह ट्रेन में किसी भी आपात स्थिति में खुद ब्रेक लगा देता है, जिससे टक्कर जैसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। यह लोको पायलट को ट्रेन चलाने में मदद करता है क्योंकि लोकोमोटिव, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक वाले उपकरणों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है।
सुरक्षा पर होगा बड़ा असर
इन रूटों पर कवच प्रणाली लगने से ट्रेन चलाना ज्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और आसान हो जाएगा। खासकर उत्तर भारत के व्यस्त और पहाड़ी इलाकों में यह व्यवस्था बहुत उपयोगी साबित होगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
भारतीय रेलवे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के तहत पूरे देश में कवच सिस्टम को तेजी से बढ़ा रही है। यह कदम रेलवे नेटवर्क को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कवच पहले से ही कई रूटों पर काम कर रहा है और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है।
यह परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर रेलवे के इन हिस्सों में ट्रेन दुर्घटनाओं का खतरा काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित सफर मिलेगा।
