नई दिल्ली: भारतीय रेलवे (Indian Railway) ने वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे नेटवर्क के बड़े विस्तार को मंजूरी दी है। कुल 100 परियोजनाओं पर 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें 6000 किलोमीटर से ज्यादा रेल लाइन शामिल है। यह फैसला पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत लिया गया है, जो देश के अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी पहुंचाने और गरीब-वंचित इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर देता है। पिछले साल की तुलना में रूट कवरेज में 114 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
रेलवे (Indian Railway) विस्तार की मुख्य बातें और निवेश का आंकड़ा
रेल मंत्रालय ने इन 100 परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। इनमें नई रेल लाइनें, दोहरीकरण, मल्टी-ट्रैकिंग, बाईपास लाइनें, फ्लाईओवर और कॉर्ड लाइनें शामिल हैं। कुल मिलाकर यह काम 6000 किलोमीटर से ज्यादा रेल नेटवर्क को कवर करेगा।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 64 परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी, जिनकी लागत 72,869 करोड़ रुपये थी और रूट कवरेज 2800 किलोमीटर से थोड़ा ज्यादा था। इस बार परियोजनाओं की संख्या में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि रूट कवरेज में 114 प्रतिशत और निवेश में 110 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया है। यह आंकड़े रेलवे के आधिकारिक बयान पर आधारित हैं और कोई अतिरंजना नहीं की गई है।
कौन-कौन से राज्य होंगे फायदा उठाने वाले
ये परियोजनाएं देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में फैली हुई हैं, जिससे रेल नेटवर्क का संतुलित विकास सुनिश्चित होगा। सबसे ज्यादा फोकस इन राज्यों पर है:
- महाराष्ट्र: 17 परियोजनाएं
- बिहार: 11 परियोजनाएं
- झारखंड: 10 परियोजनाएं
- मध्य प्रदेश: 9 परियोजनाएं
इन राज्यों में माल ढुलाई गलियारे, औद्योगिक कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की रीढ़ माने जाते हैं। यहां बेहतर रेल कनेक्टिविटी से पूरे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचेगा।
भीड़भाड़ कम करना और यात्रा सुधारने पर जोर
इन परियोजनाओं का मुख्य मकसद भीड़भाड़ वाले रूटों को खाली करना, ट्रेनों की समय पाबंदी बढ़ाना और यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। साथ ही उन इलाकों तक रेल पहुंचाना है जहां अभी सुविधाएं कम हैं।
नई लाइनें और मल्टी-ट्रैकिंग से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और यात्रा का समय घटेगा। उदाहरण के लिए, कुछ प्रमुख परियोजनाएं इस प्रकार हैं:
- कसारा-मनमाड तीसरी और चौथी लाइन: 131 किलोमीटर, लागत लगभग 10,150 करोड़ रुपये
- खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा पांचवीं और छठी लाइन: 278 किलोमीटर, लागत 8,740 करोड़ रुपये से ज्यादा
- इटारसी-नागपुर चौथी लाइन: 297 किलोमीटर, लागत 5,450 करोड़ रुपये से ज्यादा
- सिकंदराबाद (सनतनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन: 173 किलोमीटर, लागत 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा
ये चार परियोजनाएं मिलाकर करीब 28,000 करोड़ रुपये की हैं और हाई डेंसिटी ट्रंक रूटों को मजबूत करेंगी।
आदिवासी और दूरदराज क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
पीएम गति शक्ति प्लान के मुताबिक, ये परियोजनाएं सिर्फ बुनियादी ढांचा नहीं बना रही हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी ला रही हैं। जनजातीय इलाकों और दूरदराज के गांवों में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने पर खास फोकस है।
छत्तीसगढ़ में रावघाट-जगदलपुर लाइन जैसी परियोजनाएं बाजार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच बनाएंगी। झारखंड और ओडिशा में भी कई गलियारे वंचित आबादी को राष्ट्रीय विकास से जोड़ेंगे। इससे गरीब परिवारों को फायदा होगा और क्षेत्रों का समावेशी विकास संभव होगा।
मिशन 3000 मीट्रिक टन और आर्थिक फायदे
ये काम ‘मिशन 3000 मीट्रिक टन’ के अनुरूप हैं, जिसका लक्ष्य माल ढुलाई क्षमता को काफी बढ़ाना है। पोर्टफोलियो में ऊर्जा कॉरिडोर परियोजनाएं ज्यादा हैं, जो कोयला और खनिजों की तेज आवाजाही सुनिश्चित करेंगी। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
हाई डेंसिटी नेटवर्क से मुख्य मार्गों पर भीड़ कम होगी, जबकि रेल सागर कॉरिडोर से बंदरगाहों की कनेक्टिविटी और तटीय व्यापार बेहतर होगा। कुल मिलाकर लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सुधरेगा।
बड़े निवेश से स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों में मांग बढ़ेगी। देशभर में रोजगार के मौके पैदा होंगे और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी। रेलवे की क्षमता बढ़ने से आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
भविष्य के लिए मजबूत नींव
यह मंजूरी भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सिर्फ संख्या या किलोमीटर की बात नहीं है, बल्कि देश को एकजुट करने और हर क्षेत्र तक विकास पहुंचाने का प्रयास है। जैसे-जैसे ये परियोजनाएं पूरी होंगी, रेल नेटवर्क ज्यादा क्षमता वाला और भविष्य के लिए तैयार बनेगा।

