नई दिल्ली। दिल्ली मंडल, उत्तर रेलवे ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 16वीं वाहिनी और सिविल अथॉरिटीज के साथ मिलकर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। शकूर बस्ती मैकेनिकल सिक लाइन डिपो में आयोजित इस संयुक्त मॉक अभ्यास में एक कोच को बेपटरी कर दुर्घटना का सिनेरियो बनाया गया। रेलवे, NDRF, RPF, GRP, दिल्ली पुलिस और मेडिकल टीमों ने मिलकर पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया।
मॉक अभ्यास का उद्देश्य और तैयारी
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने यह मॉक ड्रिल इसलिए आयोजित की ताकि असली दुर्घटना में त्वरित और समन्वित जवाब दिया जा सके। रेलवे कंट्रोल रूम ने तुरंत सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल वैन (SPARMV), एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (ART), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सिविल डिफेंस, जीआरपी, NDRF और सिविल अथॉरिटीज को सूचना दी।
सभी टीमों ने अपनी भूमिका के अनुसार काम किया। सबसे पहले RPF, दिल्ली पुलिस और GRP के जवान घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर लिया। इसके बाद अन्य बचाव दल और एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच गईं।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
मंडल रेल प्रबंधक दिल्ली श्री पुष्पेश रमण त्रिपाठी, अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) श्री त्रिभुवन मिश्रा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी और दिल्ली मंडल के अन्य अधिकारी तुरंत दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। सभी विभागों की मदद से वहां मिनी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया, जहां से पूरे ऑपरेशन को मॉनिटर किया गया।
बचाव कार्य की प्रक्रिया
NDRF और सिविल डिफेंस की टीमों ने पलटे हुए कोच में प्रवेश किया। उन्होंने सिंगल एंट्री पॉइंट (वेस्टिब्यूल) का इस्तेमाल करते हुए कोच के अंदर यात्रियों की संख्या, उनकी स्थिति और निकासी के रास्तों का आकलन किया। जहां संभव था, वहां यात्रियों को प्राथमिक उपचार भी दिया गया।

एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन और NDRF की टीमों ने कोच को काटने के लिए कोल्ड कटिंग और अब्रेसिव कटिंग की विधि अपनाई ताकि फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। आरपीएफ कर्मियों ने यात्रियों की मदद की, घटनास्थल को टेप से सुरक्षित रखा और आसपास के लोगों को दूर रहने की चेतावनी दी। उन्होंने यात्री सामान की सुरक्षा भी सुनिश्चित की।
मेडिकल टीम की भूमिका
मेडिकल टीम ने घायल यात्रियों की पूरी लिस्ट तैयार की। इसमें हर व्यक्ति की चोट की स्थिति और उन्हें किस अस्पताल में भेजा जाना है, इसकी डिटेल्स शामिल थीं। हर घायल यात्री की जेब में नाम और जरूरी डिटेल्स वाली स्लिप रखी गई ताकि इलाज के दौरान पहचान में कोई दिक्कत न हो।

निष्कर्ष और तैयारियों का आकलन
इस संयुक्त मॉक अभ्यास से उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल ने साबित किया कि NDRF और अन्य सिविल एजेंसियों के साथ मिलकर वह किसी भी रेल दुर्घटना से निपटने के लिए तैयार है। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और तेज प्रतिक्रिया इस अभ्यास की खास बात रही।
ऐसे नियमित मॉक ड्रिल रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाते हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
