नई दिल्ली/शीतल कुमार। Railway Ministry Surgical Strike: रेल मंत्रालय में काम को लेकर लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर सर्जिकल स्ट्राइक की गई है। एक दर्जन लापरवाह कर्मचारियों एवं अधिकारियों की एक झटके में सोमवार को छुट्टी कर दी गई। वह अपने काम एवं ड्यूटी को लेकर गंभीर नहीं थे और लगातार आदेशों की अवहेलना कर रहे थे। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों एवं निचले दर्जे के अधिकारियों पर तलवार लटकी है। उन्हें भी तत्काल अपनी कार्यशैली में सुधार लाने एवं काम के प्रति जिम्मेदार बनने की हिदायत दी गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि उन्हें भी मंत्रालय से हटा दिया जाएगा।
सोमवार को जिन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को हटाया गया है उन्हें तुरंत रेल मंत्रालय छोडने का आदेश दे दिया गया है। साथ ही हिदायत दे दी गई है कि वह परिसर में नजर भी न आएं। इसमें से कुछ कर्मचारी उत्तर रेलवे से संबंधित थे तो कुछ दूसरे क्षेत्रीय रेलवे से डेपुटेशन पर आए थे।
सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर कर्मचारी रेल मंत्रालय के मीडिया एवं प्रचार विभाग से जुड़े थे। जबकि कुछ कर्मचारी रेल मंत्री के सचिवालय में काम कर रहे थे। इन कर्मचारियों में मीडिया सेल से जुड़े विनय ढींगरा, महिला कर्मचारी कुसुम, कुबेर ,कमर्शियल इंस्पेक्टर अनुपम कुमार, विपिन कुमार, ललित कुमार, चतुर्थ श्रेणी के जुड़े प्रिंस शामिल थे। इसमें से कुछ लोग 5 से 10 साल से एक ही सीट पर काबिज थे और मठाधीशी कर रहे थे, वह खुलेआम कहते थे कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड सकता।
सूत्रों के मुताबिक इनमें से कई कर्मचारी ऐसे थे जो रेलवे की ड्यूटी कम करते थे और बोर्ड में बैठकर सरकारी संसाधनों का उपयोग करते हुए अपना निजी कारोबार, बिजनेस संचालित कर रहे थे। इन लापरवाह कर्मचारियों को कई बार सुधरने का मौका दिया गया लेकिन वह अपनी आदतों से बाज नहीं आए, और सुधारने की बजाय आदेशों की अवहेलना करने लगे।
लापरवाह कर्मचारियों/अधिकारियों की मंत्रालय में जगह नहीं
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो लापरवाह कर्मचारियों की अब रेलवे बोर्ड एवं रेल मंत्रालय में कोई जगह नहीं है। अगर वह अपनी कार्यशैली में तत्काल बदलाव नहीं करते हैं तो उन्हें तुरंत मंत्रालय से हटा दिया जाएगा। इसको लेकर स्पष्ट संकेत भी दे दिया गया है। प्रथम दृष्टया उन्हें ट्रांसफर किया गया, पिफर भी नहीं सुधरे तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।
अब अधिकारियों पर भी होगी सर्जिकल स्ट्राइक (Railway Ministry Surgical Strike)
रेल मंत्रालय ने सभी 17 जोनल मुख्यालयों एवं रेलवे की इकाइयों, पीएसयू में लंबे समय से कब्जा जमाए बैठे अधिकारियों को भी हटाने का निर्देश दिया है। इसको लेकर मंत्रालय ने सभी महाप्रबंधक को पत्र जारी कर ऐसी सूची बनाने का निर्देश दिया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि जोनल मुख्यालयों में जो भी अधिकारी लंबे अर्से से कब्जा जमाए बैठे हैं, उनको फील्ड में उतारा जाए। अधिकारी जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से जोनल मुख्यालय में कार्यरत हैं, वह अब ओपन लाइन में नजर जाएं। रेल मंत्रालय के आदेश को देखते हुए महाप्रबंधकों ने तुरंत ही विभागों के प्रमुखों को आदेश जारी किया है कि वह अपने विभाग में कार्यरत ऐसे अधिकारियों की सूची तैयार करें।
इसको देखते हुए एक बड़े स्तर पर जोनल, डिवीजन स्तर, यूनिट मुख्यालय में खलबली मच गई है। गौरतलब है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जी का पहला फोकस रेलवे सेफ्टी पर ही है। लिहाजा,इसे देखते हुए सुगबुगाहट तेज है कि सभी मुख्यालय में कब्जा जमाए अधिकारियों को ओपन लाइन में तैनात किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारी तो अपनी तैनाती को बचाने के लिए जुगाड़ भी लगाने लगे हैं।
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